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डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की जांच: डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का पता लगाने के लिठकैसे की जाती है जांच? डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जानें इलाज का तरीका
इन दिनों कई लोग डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से जूठरहे हैं। आइठà¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ से जानते हैं डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की जांच कैसे होती है और यह ठीक होने में कितना वकà¥à¤¤ लगता है?
आधà¥à¤¨à¤¿à¤• समय में कई लोग डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से जूठरहे हैं। आम आदमी से लेकर बड़ी-बड़ी हसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का शिकार हो रही हैं। डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ तब गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ होता है, जब वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ मनसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¤µà¤‚ बाहरी परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बीच संतà¥à¤²à¤¨ बैठाने में असमरà¥à¤¥ होता है, तो उसमें सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने लगता है। जब यह सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ लंबे समय तक रहता है, जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का शिकार हो सकता है। इसलिठकई हेलà¥à¤¥ à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ से दूर रहने की सलाह देते हैं। बढ़ते डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की वजह से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में कई तरह के नकारातà¥à¤®à¤• विचार आते हैं। साथ ही इसका असर न सिरà¥à¤« मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर शारीरिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर à¤à¥€ पड़ता है। इसलिठअगर आप डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ में हैं, तो इससे दूर होने की कोशिश कीजिà¤à¥¤ साथ ही किसी अचà¥à¤›à¥‡ मनोचिकतà¥à¤¸à¤• से सलाह लें। अब सवाल यह है कि डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की जांच कैसे की जाती है और डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ कब तक रहता है, तो आपके इस सवाल का जबाव दिलà¥à¤²à¥€ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ à¤à¤šà¤¸à¥€à¤†à¤° इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट (HCR institute) के सीनियर साइकाइटà¥à¤°à¤¿à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤° निखिल रहेजा से जानते हैं।
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की जांच?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° निखिल रहेजा बताते हैं कि डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की कोई लैबोटà¥à¤°à¥€ डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ (laboratory Diagnose) नहीं होती है। डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का परीकà¥à¤·à¤£ करने के लिठकà¥à¤› कà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¿à¤• डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ किया जाता है। आइठजानते हैं इस बारे में-Â
मेंटल सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¸ à¤à¤—à¥à¤œà¤¾à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ या साइकाइटà¥à¤°à¤¿à¤• इंटरवà¥à¤¯à¥‚
डॉकà¥à¤Ÿà¤° का कहना है कि अगर आपको डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ जैसा महसूस हो रहा है, तो सबसे पहले किसी अचà¥à¤›à¥‡ साइकाइटà¥à¤°à¤¿à¤• के पास जाने की जरूरत होती है। डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का परीकà¥à¤·à¤£ करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° आपका साइकाइटà¥à¤°à¤¿à¤• इंटरवà¥à¤¯à¥‚ ले सकते हैं। इस इंटरवà¥à¤¯à¥‚ में आपसे कà¥à¤› सवाल किठजाते हैं। यह सवाल आपकी परà¥à¤¸à¤¨à¤² और पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤¨à¤² लाइफ से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हो सकता है। इसमें आपको सही और सटीक जबाव देने की जरूरत होती है। ताकि डॉकà¥à¤Ÿà¤° को पता लग सके कि आप डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ में हैं या नहीं। इसके अलावा कà¥à¤› सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ किया जाता है, जिसे रेटिंग सà¥à¤•ैलà¥à¤¸ कहते हैं।Â
रेटिंग सà¥à¤•ैलà¥à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ
इस परीकà¥à¤·à¤£ में सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚डरà¥à¤¸ इंटरनेशन पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‹à¤•ॉल के तहत कà¥à¤› सवाल और जबाव होते हैं। जिसमें वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को सवाल के साथ कà¥à¤› ऑपà¥à¤¶à¤¨ में जबाव दिठजाते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इन ऑपà¥à¤¶à¤¨ को चूज करना होता है। इन सवालों के जबाव के आधार पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का पता लगाने की कोशिश करते हैं। रैटिंग सà¥à¤•ैलà¥à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ में सबसे कॉमन पैकà¥à¤¡ कà¥à¤µà¥‡à¤¶à¥à¤šà¤¨ इनà¥à¤µà¥‡à¤‚टà¥à¤°à¥€ होती है। इस इंवेंटà¥à¤°à¥€ का विशà¥à¤µà¤à¤° में यूज होता है। इसे वीडीआई का टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ कहा जाता है।Â
सबजेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ टेसà¥à¤Ÿ
मेंटल सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤¸ à¤à¤—à¥à¤œà¤¾à¤®à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ और रेटिंग सà¥à¤•ैलà¥à¤¸ टेसà¥à¤Ÿ के अलावा कà¥à¤› सबजेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ होते हैं। जिसके जरिठडिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का पता लगाने की कोशिश की जाती है।
कà¥à¤¯à¤¾ बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ से हो सकती है डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की जांच?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° निखिल रहेजा बताते हैं कि डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का पता लगाने के लिठबà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ à¤à¥€ किठजा सकते हैं। हालांकि, यह टेसà¥à¤Ÿ आसानी से उपलबà¥à¤§ नहीं होते हैं। वहीं, इसे पूरà¥à¤£à¤¤: सटीक नही माना जाता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि बà¥à¤²à¤¡ के अंदर सेरोटोनिन (Serotonin) नामक नà¥à¤¯à¥‚रोकेमिकल होता है। कà¥à¤› परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में यह टेसà¥à¤Ÿ कराने की सलाह दी जाती है। इसमें 100 फीसदी सही जांच हो यह कहना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है। इसलिठपà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤®à¤°à¥€ तौर मानसिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जानने के लिठकà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¿à¤•ल डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ कराने की ही सलाह दी जाती है।Â
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को कैसे पहचानें?
साइकाइटà¥à¤°à¤¿à¤• का कहना है कि अगर आपको डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ दिखे, तो तà¥à¤°à¤‚त अपने साइकाइटà¥à¤°à¤¿à¤• या फिर साइकà¥à¤²à¥‹à¤œà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ से संपरà¥à¤• करें। डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£ कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार के हो सकते हैं-
दिन à¤à¤° उदासी महसूस करना (खासतौर पर सà¥à¤¬à¤¹ के समय)
बिना वजह पूरे दिन थकावट और कमजोरी महसूस करना।Â
खà¥à¤¦ को किसी à¤à¥€ लायक न समà¤à¤¨à¤¾, नकारातà¥à¤®à¤• विचारों से घिरे रहना।Â
बहà¥à¤¤ अधिक या बहà¥à¤¤ कम होना।Â
à¤à¤•ागà¥à¤° रहना
फैसले लेने में कठिनाई होना।
शारीरिक गतिविधि बदल जाना।
बार–बार आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ का विचार आना।
कà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¿à¤•ल डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ में किस तरह के हो सकते हैं सवाल?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° बताते हैं कि मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ डायगà¥à¤¨à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸ के लिठकà¥à¤› पैरामीटर तैयार किठगठहैं। ICD के अंदर कà¥à¤› पैरामीटर को सेट किया गया है, जिसमें कà¥à¤› मà¥à¤–à¥à¤¯ सवाल हो सकते हैं। जैसे-
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨
नॉरà¥à¤®à¤² रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ में किस तरह का बदलाव आया?
नींद में बदलाव आना (बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नींद आना या बहà¥à¤¤ कम नींद आना)
घबराहट बैचेनी होना?
मन उदास रहता है?
रोना आता है?
हिमà¥à¤®à¤¤ नहीं है?
नहाने धोना पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होना?
खाने में बदलाव
लोगों के साथ मिलने-जà¥à¤²à¤¨à¥‡ में कैसा लगता है?
इसी से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ कà¥à¤› सवाल आपसे पूछे जा सकते हैà¤à¥¤ जिसका आपको सही जबाव देने की जरूरत होती है। ताकि डॉकà¥à¤Ÿà¤° पता लगा सके कि आप डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के शिकार हैं या नहीं। साथ ही आपका सही इलाज किया जा सके।Â
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ कब तक रहता है?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° रहेजा का कहना है कि डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में इलाज के दौरान इंपà¥à¤°à¥‚वमेंट 7 दिन के अंतर दिखने लगता है। वहीं, पूरी तरह के रिकवरी की बात की जाà¤, तो 90 से 95 फीसदी मरीज 6 से 8 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में ठीक हो जाते हैं। 5 से 10 फीसदी में टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट की आवशà¥à¤¯à¤•ता थोड़ा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो सकती है। कà¥à¤› मरीजों को ठीक होने में 12 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ à¤à¥€ लग सकता है।Â
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का इलाज?
डॉकà¥à¤Ÿà¤° बताते हैं कि डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को कà¥à¤› थेरेपी दी जाती है। इसमें नैचरोपैथी, मनोवैजà¥à¤žà¤¨à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤¾ थेरेपी, योगा शामिल होते हैं। वहीं, कà¥à¤› परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में दवाइयां à¤à¥€ दी जाती है। अगर दवाइयों से मरीज ठीक नहीं होता है, तो electroconvulsive shock therapy (ect) quizlet दी जाती है। इस थेरेपी को डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का इलाज में काफी पà¥à¤°à¤¾à¤à¤¾à¤µà¥€ माना जाता है। यह उन मरीजों को दी जाती है, जिसका लंबे समय तक इलाज के बावजूद बेहतर रिजलà¥à¤Ÿ नहीं आता है।
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ कई कारणों से हो सकता है। खासतौर पर अगर आप अपनी बातें लोगों के साथ शेयर नहीं करते हैं। मन में बातों को बैठाकर रखते हैं। किसी दबाव में रहते हैं, तो आप डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ हो सकते हैं। इसलिठअगर आपको किसी तरह का सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¸ है, तो उसे बाहर निकालने की कोशिश करें। ताकि डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से बच सकें। वहीं, मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती है, à¤à¤¸à¤¾ न सोचे। मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाने से घबराà¤à¤‚ नहीं। अपना समय पर इलाज कराà¤à¤‚। मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ आपके शारीरिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। इसलिठमानसिक परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का à¤à¥€ सही इलाज कराà¤à¤‚। ताकि आप सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रह सकें। मेंटल हेलà¥à¤¥ के लिठआप नियमित रूप से à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ और योग करें। इससे आपको काफी फायदा हो सकता है।Â
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